अपनी जान कहने आया हूँ
- HoodySoul

- Jun 30, 2020
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एक अजीब सी दास्तां लिखने आया हूँ, मैं उसको आज, अपनी जान कहने आया हूँ। ख़्वाबों में भी जिसे ढूँढती है आँखे, आज बाहों में उसको पाने आया हूँ, दिल देने का तो बस बहाना है, मेरी जान के लिए अब जान देने आया हूँ। मैं अपनी जान को जान कहने आया हूँ । न जाने कौन से कारण थे , के उसका होकर भी उसका न हो सका। पर आज अपनी मोहब्बत के लिए, उस कारण को कुर्बान करने आया हूँ। मैं अपनी जान को जान कहने आया हूँ । जो उम्र गुजर रही थी उसके बगैर, अब ये उम्र सिर्फ उसके नाम करने आया हूँ , तराजू पर रख अपनी ज़िन्दगी आज, मैं लहू से इश्क को लाल करने आया हूँ । मैं अपनी जान को जान कहने आया हूँ।।





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